Tagged: लोककथा
मैं आज तक किसी दर्ज़ी के पास दूसरी बार अकेले फिटिंग के लिए नहीं जाती। पहली बार जाओ, नाप दो, बात खत्म। दूसरी बार जाना पड़े तो साथ में कोई और लड़की ज़रूर हो, चाहे ननद हो या पड़ोस की छोरी। ये नियम मेरी…
0 replies- Fiction
रस्सी हर सुबह गीली मिलती है
मैं हर सुबह पहला काम यही करता हूँ। नल खोलने से पहले, चाय की पतीली चढ़ाने से पहले, पिछवाड़े जाकर उस पुराने कुँए की रस्सी हाथ में लेता हूँ। गीली मिले तो उस दिन कुएँ की तरफ पीठ करके सोता हूँ, और शाम का…
0 replies

