टैग: chhatarpur
पहले लगा नल टपक रहा है। हमारे यहाँ पुराने घरों में यही होता है, रात को सन्नाटा हो तो हर बूंद ड्रम पे ऐसे बजती है जैसे कोई टिक-टिक कर रहा हो। मैं लेटा हुआ मोबाइल में लगा था, सोचा उठकर टोंटी बंद कर…
0 जवाब- काल्पनिक
रात की सफाई
नहीं, मैं झूठ नहीं बोल रही। मैंने कुछ नहीं देखा, बस सुना है। चतरपुर के जिला अस्पताल में मैटरनिटी वार्ड की नाइट ड्यूटी पर लगते ही सिस्टर कमला मुझे एक कागज़ थमाती हैं, हाथ से लिखा हुआ, कोनों से…
0 जवाब - काल्पनिक
चॉक का निशान
बारिश की आवाज़ थी, यही लगा था मुझे। छत पर टप-टप, हल्की, लगातार। बालकनी में गया तो आसमान साफ़ था, तारे तक दिख रहे थे उस रात। आवाज़ नीचे से आ रही थी, चाचा के घर की सीढ़ियों से — कोई चॉक की डिबिया हिला…
0 जवाब - काल्पनिक
पीपल के नीचे घंटी
मैंने वो घंटी नहीं बजाई थी। यह बात मैं खुद से दोहरा रहा था, स्कूल के बरामदे में बैठा, हाथ में टॉर्च लिए जो आधी बैटरी पर टिमटिमा रही थी। रात के साढ़े ग्यारह रहे होंगे, या पौने बारह — घड़ी देखने का…
0 जवाब

