अलौकिक मुठभेड़ें
भूत, आत्माएँ और वे चीज़ें जो होनी नहीं चाहिए — पर आपने उन्हें देखा।
पीपल की जड़ में एक तख्ती टिकी थी। लकड़ी की, कोने से थोड़ी झुलसी हुई, जैसे किसी ने चूल्हे के पास रख दी हो। स्कूल में तख्तियाँ अब कोई नहीं लाता, बच्चे मोबाइल पे फोटो खींच के होमवर्क कर लेते हैं। फिर भी…
0 जवाबनहीं, वो सियार नहीं था। ये पहले साफ़ कर दूं, क्योंकि मेरे मामा भी यही समझते हैं, और मैं उन्हें कभी टोकता नहीं। पर जो चीज़ मैंने ढाबे पर रहकर देखी, तीन साल रहा वहां... नहीं, ठीक से याद करूं तो ढाई साल…
0 जवाबनहीं साहब, मैंने कोई चूड़ी नहीं तोड़ी। ये पहली बात साफ़ कर दूँ, क्योंकि आप जब से बैठे हैं, बार-बार यही पूछ रहे हैं। चूड़ी मैंने नहीं तोड़ी, वो तो उतरते वक़्त खुद टूट गई थी। बाकी जो कुछ हुआ, वो मेरा…
0 जवाबमैं सुबह से पत्तल गिन रही थी, तेरहवीं के लिए, और तीन बार गिनती बिगाड़ चुकी थी। अठारह मेहमान थे, अठारह पत्तल, फिर भी मेरा हाथ हर बार उन्नीसवीं रख देता था अलग से, जैसे कोई और भी आने वाला हो। दिमाग असल…
0 जवाबनहीं भाई, तेरह नहीं थे, चौदह थे। ये बात गुरुजी वाचमैन ने खुद बताई थी, बीड़ी सुलगाते हुए, गेट के उस टूटे स्टूल पर बैठकर, जिसका एक पाया ईंट के सहारे टिका था। मैं दमोह के आदर्श हॉस्टल में उनसे मिलने गया…
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चिंदवाड़ा की सराफा लाइन वाला दूध
आज सुबह मैं अपनी बेटी की चोटी बाँध रहा था और तीसरी बार रिबन उलटा बाँध दिया। वो चिल्लाई, पापा दर्द हो रहा है, और मुझे पता भी नहीं चला कब खोपड़ी में उँगली फँस गई। दिमाग उसी घर पर अटका था जो गली के…
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बरवानी मेले वाली मेहंदी
अरे रुक, यही तो मैं बता रही हूँ, सुन तो पूरी। हाँ वही मेहंदी वाली, कोने वाले स्टॉल की। याद है ना, जो पीपल के पास लगती थी हर साल मेले में, ठीक उसी पेड़ के नीचे जहां छोटू का चाचा हर साल गन्ने का जूस…
0 जवाब हमारे यहाँ एक ही नियम है, बाकी सब चलता है। सीट नंबर बत्तीस की टिकट कभी नहीं काटी जाती। चाहे बस खचाखच भरी हो, चाहे कोई खड़ा होकर पूरा रास्ता जाने को तैयार हो, रामलाल भैया उस सीट की तरफ़ इशारा भी नहीं…
0 जवाबनियम यह है: रात की आख़िरी ट्रेन के बाद हम वेटिंग रूम की खिड़की वाली मेज़ पर एक थाली रख देते हैं। कभी चखी नहीं जाती, कभी पूछा नहीं जाता किसके लिए है। बस रख दो, ढँक दो, ताला लगाकर घर चले जाओ। यह कटनी…
0 जवाबमैं बर्तन माँज रही थी और तीसरी थाली अभी तक साबुन से भरी पड़ी थी, हाथ चल रहे थे पर दिमाग दरवाज़े पर अटका था। रात के साढ़े नौ बजे थे, खाना खत्म हुए बीस मिनट भी नहीं हुए थे — या शायद पंद्रह ही हुए थे,…
0 जवाबहमने पहले ही रात को गिनती शुरू कर दी थी, पर तब तक हमें नहीं पता था कि किस चीज़ की गिनती हो रही है। निशा की शादी को तीन महीने हुए थे, या शायद साढ़े तीन, अम्मा को ठीक याद नहीं रहता ऐसी बातें। गर्मी में…
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सीढ़ी पर सिर्फ ऊपर जाने के निशान
मीरा ने सीढ़ी के तीसरे डंडे पर पानी की बूंद देखी, फिर चौथे पर, फिर पाँचवें पर। हर बूंद के इर्द-गिर्द साड़ी के पल्लू जैसा गीला घेरा था, पंजे का निशान साफ़, पर एड़ी का निशान कहीं नहीं। जैसे कोई सिर्फ…
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रस्सी हर सुबह गीली मिलती है
मैं हर सुबह पहला काम यही करता हूँ। नल खोलने से पहले, चाय की पतीली चढ़ाने से पहले, पिछवाड़े जाकर उस पुराने कुँए की रस्सी हाथ में लेता हूँ। गीली मिले तो उस दिन कुएँ की तरफ पीठ करके सोता हूँ, और शाम का…
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टाइपराइटर की आपत्ति
आज मैं स्टाम्प काउंटर की पुरानी अलमारी साफ़ कर रहा हूँ, और तीसरी बार वही फ़ाइल गिरा चुका हूँ। छतरपुर कचहरी परिसर में शाम पाँच बजे के बाद कोई नहीं रुकता। स्टाम्प वेंडर भी अपनी मेज़ समेट कर निकल जाते…
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रात की सफाई
नहीं, मैं झूठ नहीं बोल रही। मैंने कुछ नहीं देखा, बस सुना है। चतरपुर के जिला अस्पताल में मैटरनिटी वार्ड की नाइट ड्यूटी पर लगते ही सिस्टर कमला मुझे एक कागज़ थमाती हैं, हाथ से लिखा हुआ, कोनों से…
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दामोह जंक्शन का पंखा
रात के पौने बारह बजे मुझे लगता है कोई सीटी बजा रहा है, दूर से, इंजन की सीटी जैसी। बैग कंधे पर टिकाकर मैं वेटिंग रूम के दरवाज़े तक जाता हूँ। प्लेटफ़ॉर्म पर कोई ट्रेन नहीं, कोई अनाउंसमेंट नहीं। फिर समझ…
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रात के खाने के बाद वही आहट
मैं मटर छील रही हूँ और तीसरी फली भी पूरी नहीं छिली कि दाने उछल कर परात के बाहर गिर जाते हैं। ध्यान मोबाइल पर है, नेटवर्क तीन घंटे से गया हुआ है, टावर वाले कहते हैं शाम तक आएगा। सुनंदा चाची बरामदे में…
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पंडित जी की कैसेट
नहीं, मैंने टेप रिवाइंड नहीं किया। कसम से, मैं टेबल से हिला तक नहीं था, फिर भी वो शब्द दोबारा बज गया। रात के साढ़े नौ बजे। सतना के जयस्तंभ चौक के पीछे वाली गली में पंडित रामकिशोर जी की संस्कृत ट्यूशन…
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जो बचे उसे जलाना है, फेंकना नहीं
साहब, मैं आपको वही बताऊँगा जो नंदू भैया ने मुझे सिखाया था। जब भी थाली में से कुछ बचे, चाहे एक रोटी का टुकड़ा ही क्यों न हो, उसे पीछे वाले गड्ढे में जलाना है। कुत्तों को मत डालना, नाली में मत बहाना,…
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वो जवाब जो कभी पूछा नहीं गया
मैं मर्चुरी के कॉरिडोर में किसी सवाल का जवाब नहीं देता, चाहे सवाल मुझसे पूछा गया हो या नहीं। भिलाई के जेएलएन हॉस्पिटल में नाइट ड्यूटी करते हुए यह नियम मैंने नहीं बनाया था। राजू भैया ने बनाया था, जो…
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