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- Fiction
दामोह जंक्शन का पंखा
रात के पौने बारह बजे मुझे लगता है कोई सीटी बजा रहा है, दूर से, इंजन की सीटी जैसी। बैग कंधे पर टिकाकर मैं वेटिंग रूम के दरवाज़े तक जाता हूँ। प्लेटफ़ॉर्म पर कोई ट्रेन नहीं, कोई अनाउंसमेंट नहीं। फिर समझ…
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