Skip to main content
HorrorGod

लांजी चौकी की रात वाली एंट्री

0 posts · Joined Aug 13, 2026

1 min read3 views0 replies
Listen to this storyDownload MP3 · 1:31

यह कहानी बालाघाट ज़िले की लांजी चौकी में रखी गई है क्योंकि छोटी चौकियों में लाश और रजिस्टर एक ही कमरे की दूरी पर होते हैं, और वहाँ की सुनसान रात इस डर को असली ज़मीन देती है।

रजिस्टर की बात बाद में, पहले लाश की बात। वैनगंगा में डूबा एक आदमी शाम को जाल में फंसा था, मछुआरों ने निकाला, कोई शिनाख्त नहीं हुई, तो हमारे यहाँ ले आए। पोस्टमार्टम वैन बालाघाट से सुबह आनी थी, रात भर बॉडी रखनी थी। हमारे यहाँ अलग मुर्दाघर नहीं है। स्टोर वाले कमरे में ही रख दिया, वही जहाँ पुराने डंडे और टूटी साइकिल पड़ी रहती है, और एक बोरा जिसमें दिवाली की झालर भरी है, वो झालर पिछले तीन साल से किसी काम नहीं आई।

हवलदार जगदीश पान लेने गया था बस स्टैंड तक। कहता है दस मिनट में आऊँगा साहब, चालीस हो गए। उसके मोबाइल पर नेटवर्क वहाँ से नहीं आता, ये बात वो हर बार ऐसे बताता है जैसे मुझे पहली बार पता चल रहा हो, हर हफ्ते यही किस्सा।

मैं अकेला रजिस्टर के सामने बैठा था। रात के साढ़े ग्यारह बजे थे, दीवार वाली घड़ी दस मिनट पीछे चलती है, या शायद बारह मिनट, ठीक याद नहीं, तो असल में पौने बारह के आसपास होंगे। मच्छर बहुत थे। कॉइल जल रही थी पर धुआं कमरे में नहीं टिकता, बरामदे की तरफ खिंच जाता, हवा उधर से आ रही थी।

मैंने रजिस्टर खोला रात की एंट्री लिखने के लिए —

by Biswarup Ganguly via Own work — CC BY 3.0

No ratings yetSign in to rate

Replies0 replies

No one has dared to reply yet.

Only members can reply to this story.