अनसुलझे अनुभव
ऐसी घटनाएँ जिनकी कोई तार्किक व्याख्या नहीं — रहस्यमय संयोग और भय।
पहले लगा नल टपक रहा है। हमारे यहाँ पुराने घरों में यही होता है, रात को सन्नाटा हो तो हर बूंद ड्रम पे ऐसे बजती है जैसे कोई टिक-टिक कर रहा हो। मैं लेटा हुआ मोबाइल में लगा था, सोचा उठकर टोंटी बंद कर…
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लांजी चौकी की रात वाली एंट्री
रजिस्टर की बात बाद में, पहले लाश की बात। वैनगंगा में डूबा एक आदमी शाम को जाल में फंसा था, मछुआरों ने निकाला, कोई शिनाख्त नहीं हुई, तो हमारे यहाँ ले आए। पोस्टमार्टम वैन बालाघाट से सुबह आनी थी, रात भर…
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मुलताई हाईवे का ढाबा
सोनू ने ढाबे के आगे चूने की लाइन देखी और रुक गया। आधी अधूरी थी, दायीं तरफ़ तंदूर तक जाकर बीच में टूट गई थी, जैसे किसी ने बीच रास्ते में ही डिब्बा फेंक दिया हो। मालिक रामलाल सुबह ही निकल गए थे, बगल के…
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ब्याज वाली अम्मा के घर के नियम
पहले मुझे लगा कोई सिक्का गिरा है, वही टन-टन वाली आवाज़, जैसे कोई पैसा गिनते हुए थाली में डाल रहा हो। फिर ध्यान से सुना तो समझ आया, ये सिक्के की आवाज़ नहीं थी। चूड़ी की थी। एक हाथ में पहनी सात-आठ…
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